लाईफ का पाँचवाँ प्रपोजल, बस सबको मना करती गई... दिल में एक वही है आज तक जिस के लिए सबने बोला तेरे लिए अच्छा नहीं है ये लड़का।
खैर, पाँचवाँ प्रपोजल में ना जान ना पहचान बस आशीष को ना कहने के बाद भी उसका बोलना इंतज़ार रहेगा तुम्हारा। यार हम दोस्त रहेंगे मैं सिंगल रहना चाहती हूँ अभी। कोई नहीं, चलो हम दोस्त तो रहेंगे ही लेकिन फिर भी आई लव यू...तुम बहुत अच्छी हो यार।
अच्छा सुनो दोस्ती में मिलते रहना चाहिए क्या हम दोनों कहीं मिल सकते हैं यार अभी पासिवल नहीं है। मैं बहुत दूर रहती हूँ दिल्ली से,नहीं पता कब वापस आऊंगी दिल्ली। कोई नहीं मैं आ जाता हूँ तुमसे मिलने... क्या बिना मिले दोस्ती नहीं चल सकती क्या? अरे! मिलने से बोंड स्ट्रांग होता है।
ठीक है जब दिल्ली आऊंगी तब हम पक्का मिलेंगे।
ओर हाँ हम हमेशा दोस्त रहेंगे।
खैर, पाँचवाँ प्रपोजल में ना जान ना पहचान बस आशीष को ना कहने के बाद भी उसका बोलना इंतज़ार रहेगा तुम्हारा। यार हम दोस्त रहेंगे मैं सिंगल रहना चाहती हूँ अभी। कोई नहीं, चलो हम दोस्त तो रहेंगे ही लेकिन फिर भी आई लव यू...तुम बहुत अच्छी हो यार।
अच्छा सुनो दोस्ती में मिलते रहना चाहिए क्या हम दोनों कहीं मिल सकते हैं यार अभी पासिवल नहीं है। मैं बहुत दूर रहती हूँ दिल्ली से,नहीं पता कब वापस आऊंगी दिल्ली। कोई नहीं मैं आ जाता हूँ तुमसे मिलने... क्या बिना मिले दोस्ती नहीं चल सकती क्या? अरे! मिलने से बोंड स्ट्रांग होता है।
ठीक है जब दिल्ली आऊंगी तब हम पक्का मिलेंगे।
ओर हाँ हम हमेशा दोस्त रहेंगे।
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