हरियाणा के गुरुग्राम जिले में है शीतला माता मंदिर। इस मंदिर की समाज में अनेक मान्यतांए हैं। ऐसा कहा जाता है कि शीतला माता मंदिर में मांगी हुई हर कामना ज़रूर पूर्ण होती है। श्रद्धालु यहां पर मुंडन तथा नवIविवाहित जोड़े की जात के लिए मंदिर में आते हैं। सिर्फ यही नहीं श्रद्धालु चुन्नरी बांधकर मन्नत मांगते हैं। ऐसा कहा जाता है रहा हा कि शीतला माता पुस्तक में गुरुग्राम का नाम गौड़ग्राम था।
महाभारत काल से जुड़ा हुआ है मंदिर का इतिहास:
शीतला माता मंदिर की कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि यहां आचार्य गुरु द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी थी। जब गुरु द्रोण युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे, तब उनकी पत्नी कृपि सती पर युद्ध पर बैठने को तैयार हुई थी। जब माता कृपि सती पर बैठी तब माता ने लोगों से कहा कि जो भी इस सती स्थल पर अपनी मनोकामना माँगने आएगा उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी।
ऐतिहासिक बात: सन् 16वीं सदी में राजा भरतपुर ने सवा किलो सोने की मूर्ति बनवाकर स्थापित की थी, जहाँ माता कृपि सती हुई थी।
मेले का समय: इस मंदिर को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यहां चैत्र माह और वैशाख व आषाण माह में भारी मेले लगता है। मेले में कम से कम 50 लाख श्रद्धालु आते हैं और दर्शन के लिए लोग भारत के कोने-कोने से आते हैं।लेकिन ज्यादा तादाद में लोग राजस्थान और उत्तर-प्रदेश के होते हैं। मेले में भीड़ होने के कारण मंदिर प्रशासन मंदिर को ठेके पर दे देते हैं। मंदिर शहर के बींचो-बीच स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं को किसी भी परेशानी को सामना नहीं करना पड़ता। बस-स्टैंड और रेलवे स्टेशन मंदिर के नजदीक होने के कारण आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर पहुंचने में आसानी होती है । निजी वाहनों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की भी उचित व्यवस्था परिसर में मौजूद है