कई दिनों से सोच रही थी कि तुम्हें ये ख़त लिखूँ, मगर हर बार टालते जा रही थी क्यूंकी जो लिखना चाहती हूँ वो तुम्हें शायद अजीब भी लगे।
सुनो मैंने कोई ख़ास इंतज़ार नहीं किया है तुम्हारा लेकिन तलाश कर रही हूँ तुम्हें पिछले कुछ समय से। ढूंढ रही हूँ कि आखिर हो कहाँ तुम!और इतनी देर क्यूँ कर रहे हो? जानते हो तुम्हारे वजह से घरवाले भी बहुत परेशान हैं,क्यूंकी एक तुम्हारे मिलने की आस में कई रिश्ते ठुकरा दिए मैंने। मगर मैं भी क्या करूँ! देखो ये जो Compromise शब्द है न बचपन से ही इससे बहुत वास्ता रहा है,लेकिन अब कोई समझौता नहीं करना चाहती। तुम तो ज़िन्दगी बनने वाले हो न,पूरी ज़िन्दगी बदलने वाले हो,और आधी ज़िन्दगी तो गुज़ार दी है मैंने,पर जो तुम्हारे साथ जियूँ वो पूरी ज़िन्दगी चाहती हूँ।
सुनो तुम कोई राजकुमार जैसे होगे अरे हाँ वही Prince Charming ऐसा तो कभी नहीं सोचा मैंने बस average रहोगे, ठीक ठाक से थोड़े ऊपर तो चलेगा। तुम किसी सरकारी नौकरी के ऊँचे पद पर नहीं काम करते होगे तो भी चलेगा लेकिन अगर तुम्हारा शौक़ ही तुम्हारा पेशा होगा तो बहुत खुश रहूँगी मैं।
सुनो मुझे अपनी अलमारी में कोई ज़ेवरात नहीं चाहिए,लेकिन एक shelf जिसमे ख़ूब सारी किताबें हो और तुम्हारे पास इतना वक़्त भी हो कि उन किताबों कि lines पढ़कर तुम्हें सुना सकूँ। मुझे party करने का,बाहर जाने का,ज़्यादा लोगों से मिलने का शौक़ नहीं है,और Phone Manner तो बिल्कुल नहीं है दो मिनट के बाद और बताओ और बताओ करती हूँ। लेकिन कुछ लोग हैं ज़िन्दगी में जिनके साथ किसी भी गली नुक्कड़ पर घूम सकती हूँ पार्टी कर सकती हूँ,देर तक बात कर सकती हूँ,वो ख़ास लोग हैं मेरे दोस्त हैं। तुम मुझे उनसे मिलने की इजाज़त हमेशा देना,अगर तुम्हें Insecurity जैसी कोई feeling आ रही हो तो एक बात बता दूँ मैं रिश्तों को मिलाती नहीं। वो मेरे दोस्त हैं,बूढ़े होने तक हमने दोस्ती निभाने का वादा किया है,तुम जब मिलोगे उनसे तो समझोगे उन्हे।
और तुम्हें बहुत strong होना पड़ेगा क्यूंकी मैं बहुत कमज़ोर हूँ,बहुत उलझी हुई,परेशानी को खुद न्योता देती हूँ,कभी कभी बहुत गुस्सैल और नकचढ़ी हो जाती हूँ तुम बस ऐसी situation में संभाल लेना मुझे बाकी पूरे समय मैं तुम्हें संभाल सकती हूँ,अरे मैं caring बहुत हूँ इतना कि hostel में सब मुझे चिंतामड़ी बुलाते थे,तो तुम्हारा भी बहुत ख़याल रखूँगी।
मैं हर situation में adjust कर सकती हूँ यही तो सीखा है हमेशा से,और पढ़ाई भी commerce से की है adjustment तो भर भर के पढ़ाया गया है,पर जहाँ तुम्हें adjust करना पड़े तुम भी कर लेना। मैं तुम्हारी family की हमेशा respect करूँगी जो भी रिश्ते तुम्हारे होंगे मैं उन्हें पूरे दिल से निभाऊँगी,लेकिन तुम भी मेरे सभी रिश्तों का सम्मान करना।
सुनो सिगरेट-विगरेट नहीं पीने दूँगी तुम्हें,पर दारू पियूँगी तुम्हारे साथ कभी कभी।
देखो ये दिखावे वाली ज़िन्दगी से थोड़ा ऊपर रहना तुम,समाज के लिए नहीं ख़ुद के लिए जीना। पैसों के पीछे ज़्यादा मत भागना।
सुनो एक ख़्वाहिश हमेशा से दिल में है जो अबतक पूरी नहीं हो पायी,महीने की एक छुट्टी Orphanage के बच्चों के साथ बिताने की,तुम चलोगे न मेरे साथ? और हाँ गुरुद्वारे भी चलना पड़ेगा। और सुनो मज़हब के नाम पे तुम्हें बस इंसान ही होना होगा,ये हिन्दू पंती ज़ाहिर करने वाले मत होना तुम।
जानते हो मैं डरती हूँ शादी से शुरू से ही क्यूंकी आस-पास बहुत खोखले रिश्ते देखे हैं मैंने जो सिर्फ़ नाम के रिश्ते हैं,जो सिर्फ़ इसलिए निभा रहे हैं क्यूंकी रिश्ता तोड़ नहीं सकते। तो सुनो मैं अपनी ये वाली ज़िन्दगी दिल से निभाना चाहती हूँ,तुम्हारे इश्क़ में होना चाहती हूँ। आने वाली उस ज़िन्दगी का हर लम्हा जीना चाहती हूँ,तुम्हारी होकर,तुम्हारे लिए।
एक ज़रूरी बात कि मेरा अतीत भी है और उसी गुज़रे कल के साथ accept कर लेना मुझे।तुम मेरे लिए थोड़ा करना मैं तुम्हारे लिए बहुत करूँगी,तुम वो टिपिकल हिन्दुस्तानी मर्द टाइप के मत होना। और हाँ मैं बहुत झगड़ालू हूँ,खूब झगड़ा भी करूँगी तुमसे,जब ज़्यादा गुस्सा करूँ तो मुझसे ही गुस्सा हो जाना,मैं झट से तुम्हें मनाने मे जुट जाऊँगी।
ऐ सुनो ना कहाँ हो तुम?घरवालों से कहूँगी तो समझ नहीं पाएंगे,बनिया हैं ना पैसों के सिवा बाकी चीज़े कम समझ आती हैं,सोचेंगे मैं पागल हो चुकी हूँ। मैं सिर्फ़ तुम्हें तलाश कर सकती हूँ। तुम हो ना इस दुनियाँ में कहीं,आओ आ कर मिलो इससे पहले कि घरवाले फ़िर से किसी और कि बात छेड़े।
और हाँ अगर ऐसे नहीं हो तो ना मिलना मुझसे,मैं तुम्हारे बिना खुश हूँ।
तुम्हारी मैं