रोज सुबह की तरह मैं आज भी मैट्रो से आफिस के लिए निकली थी
जब मैं मेट्रो में चढ़ी, मेरी नजर महिला पर गई। उसका चेहरे से लग रहा था जैसे कि कितनी परेशान हो माथे पर बिंदी, होठों पे हल्की सी लिपस्टिक लगी हुई थी, बाल भी थोड़े से बिखरे हुए थे।
वह महिला गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी , 7-8 महीने का गोद में बच्चा लिए बैठी थी। घिटोरनी स्टेशन आने पर मैंने उस से पूछा कहां जा रही हो, वो बताती है अपने पति पास जा रहे हैं, गुड़गांव किसी से पैसे लेने आए थे। इतने वो महिला मुझसे पूछती है कि आजादपुर कितनी देर में आयेगा, मैंने कहा अभी एक घंटा लगेगा।
इतने में उससे ओर बात करती उसका बच्चा रोने लगा था। महिला अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए थोड़ा इधर उधर देखती है, फिर साड़ी के पल्लू में बच्चे का मुंह ढ़क्कर दूध पिलाने लगती है। दूध पीने के बच्चा अपनी मां के साथ खेलने लगता है।
महिला ने मुझसे पूछा कि आपको कहां जाना है, मैंने कहा पटेल चौक जाना है।
उस बच्चे को खिलाते हुए आई . एन. ए से पटेल चौक तक सारे स्टेशन कहां निकल गए पता ही नहीं चला।
मैं उतरने के लिए खड़ी हुई महिला मुझसे पूछती है आप जा रही हो मुझे छोड़कर। इतना सुनते ही मैं स्टेशन पर उतर गई।
जब मैं मेट्रो में चढ़ी, मेरी नजर महिला पर गई। उसका चेहरे से लग रहा था जैसे कि कितनी परेशान हो माथे पर बिंदी, होठों पे हल्की सी लिपस्टिक लगी हुई थी, बाल भी थोड़े से बिखरे हुए थे।
वह महिला गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी , 7-8 महीने का गोद में बच्चा लिए बैठी थी। घिटोरनी स्टेशन आने पर मैंने उस से पूछा कहां जा रही हो, वो बताती है अपने पति पास जा रहे हैं, गुड़गांव किसी से पैसे लेने आए थे। इतने वो महिला मुझसे पूछती है कि आजादपुर कितनी देर में आयेगा, मैंने कहा अभी एक घंटा लगेगा।
इतने में उससे ओर बात करती उसका बच्चा रोने लगा था। महिला अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए थोड़ा इधर उधर देखती है, फिर साड़ी के पल्लू में बच्चे का मुंह ढ़क्कर दूध पिलाने लगती है। दूध पीने के बच्चा अपनी मां के साथ खेलने लगता है।
महिला ने मुझसे पूछा कि आपको कहां जाना है, मैंने कहा पटेल चौक जाना है।
उस बच्चे को खिलाते हुए आई . एन. ए से पटेल चौक तक सारे स्टेशन कहां निकल गए पता ही नहीं चला।
मैं उतरने के लिए खड़ी हुई महिला मुझसे पूछती है आप जा रही हो मुझे छोड़कर। इतना सुनते ही मैं स्टेशन पर उतर गई।
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