कहने के लिए तो हम 21 वीं सदी में जी रहे हैं। हमारे देश के 60% से अधिकतम बच्चे को तो पता ही नहीं है फादर्स डे जैसी भी कोई चीज होती है।
गांव में रह रहा बच्चा इस बात से बेखबर है कि फादर्स डे या मदर्स डे भी कोई दिन होता है।
इन बच्चों को रोज मां-बाप की मुस्कुराहट देखकर ही खुशी मिलती है।
कई बार तो मुझे ऐसा लगता है कि मानो इन सब डे के नाम पर सोशल मीडिया साइट पर फोटो पोस्ट करना एक खेल जैसा लगने लगा है।
मुझे तो कई बार एक फोटो देखते हुए बहुत दुख होता है। "सोफे पे बैठा बच्चा सोशल मीडिया पे फोटो पोस्ट कर रहा है हैप्पी मदर्स डे लिखकर, वहीं पास में मम्मी सफाई कर रही हैं।"
ये सब मात्र सोशल साइट तक ही है क्या??
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