गांधी-नेहरू के ज़माने से चली आ रही अंग्रेजी ने आज एक स्टैंडर्ड सेट कर दिया है। इस अंग्रेज़ी ने पढ़ाई के नाम पर स्टैंडर्ड बना दिया है। अरे आई मीन की अगर मुझे अंग्रेज़ी नहीं बोलने आती उन लोगों के हिसाब से मैं अनपढ़ हूं।
वैसे आप सबसे मेरा एक सवाल है आप अपनी मातृभाषा बोलने में इतना शर्म क्यों करते हैं??
मुझे तो सुकून मिलता है, हिंदी बोलने पर। शर्म करनी भी क्यूं है, हम जिसमें खुद को कंफर्टेबल फील करते हैं, हमें वही काम करना चाहिए।
आज की दिखावे वाली ज़िन्दगी में ज्यादा उलझ गए हैं। मैं यह नहीं कह रही हूं आपको कि आप अंग्रेज़ी मत बोलिए, बस खुद की जो पहचान है उसको मत खोइए।
ये जो शर्म हम करते हैं ना हिंदी में बोलने की इसको खत्म कर दो। सामने वाला क्या सोचेगा हमारे बारे में सोचने दो, हमें बस ये सोचना ही कि हम किसमे कंफर्टेबल है। अपना कंफर्ट जोन हम डिसाइड करेंगे, ना कि दुनिया।
जहां अपने देश के प्रधानमंत्री मोदी ने यू. एन में जाकर हिंदी स्पीच दी थी, हम सबके लिए ऐतिहासिक क्षण था। जहां देश के प्रधानमंत्री हिंदी बोलने पर गर्व महसूस करते हैं, हमें भी हिचकिचाना नहीं चाहिए। हमें भी हिंदी बोलने में गर्व होना चाहिए।
क्यूंकि अंग्रेज़ी हमारा स्टैंडर्ड नहीं सेट करती है।
आपकी अंग्रेज़ी का 'अ' मेरे समझ से बाहर है, मेरी हिंदी कि बिंदी बस मुझे नजर आती है।

शानदार
ReplyDelete❤❤
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteबहुत खूब कम शब्दों मे किफायती बातें.....
ReplyDeleteबहुत खूब कम शब्दों मे किफायती बातें.....
ReplyDeleteअप्रतिम लेख
ReplyDeleteबेहतरीन ऐसे और लेखों और लेखकों की जरुरत
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